Posts tagged ‘truth of life’

September 3, 2011

Who’ll cry when you die?

by Dev B

When you’ll stop laughing and crying
When you’ll stop listening and talking
When you will stop to live and to die
When you’ll kiss world with final goodbye

Your remembrances will be on cards
Your old photos will be on walls.
Everyone will remember you on that day
Everyone will forget you after few days

When you’ll leave all remembrance
Whose heart will have your memoir forever?
Who will remember when you die?

When dark night will come to never go
When you’ll stop your journey forever
When you’ll sleep to never wakeup
When you’ll not hear your heartbeat

Your death will be news for many
Your funeral will be event for many
Everyone’s tears will come on that day
Everyone’s tears will freeze after few days

When your eyes will dry
Whose heart will cry for you forever?
Who’ll cry when you die?

– Dev B

Stand for what you believe in, even if you have to stand alone because you’ll be remembered for your stand, not by the people for whom you take stand.

August 19, 2011

तन्हाई और परछाई

by Dev B

लिए ढेर सारी तन्हाई
सुबह ने बनायीं कई परछाई
उनमे एक थी “मेरी परछाई”
चला था लिए मैं तन्हाई,
राह न जाने “मेरी परछाई”|

साथ चली थी कई परछाई
कभी वो अपनी थी तन्हाई
कभी वो परायी थी परछाई,
कभी वो काली थी परछाई
कभी वो धुंधली थी तन्हाई

बनती बिगडती परछाई
हल चल करती तन्हाई
पल पल बदलती परछाई
क्षण क्षण छलती परछाई
मन मन बहलाती तन्हाई

बढती घटती थी परछाई
तन ढंग थी सारी परछाई
मन संग थी एक तन्हाई
जो अब दूर करे तन्हाई
मन ढूंढती थी “वो परछाई”

जानी पहचानी सी परछाई
मिल गई एक “वो परछाई”
कुछ खास थी अब तन्हाई
घटती मन की अब तन्हाई
लगी मुझ-सी “वो परछाई”

पल पल ख़तम होती तन्हाई
हर पहर बढती “वो परछाई”
क्या मेरी थी “वो परछाई”
या मैं था उसकी “वो परछाई”
एक दूजे के हम “वो परछाई”

साँझ होते धुंधलाई “वो परछाई”
फिर घबराई “मेरी परछाई”
उस रात जानी “मेरी परछाई”
मेरी या तेरी हो “वो परछाई”
अँधेरे में न साथ देती “कोई परछाई”

– Dev B

August 18, 2011

पल पल हरक्षण हरपल

by Dev B

पल पल में बीता कल
बीत रहा आज हरपल
तो पल पल बीतेगा कल
पल पल हरक्षण हरपल

तू समर्पण कर हरपल
तू अर्पण कर पल पल
तो न समझे कोई हरपल
पल पल हरक्षण हरपल

इन्तजार न कर हरपल
ऐतबार न कर पल पल
तो बेजार न कर ये पल
पल पल हरक्षण हरपल

छुटे साथ कोई हरपल
टूटे बिस्वास पल पल
तो जीले रिश्तों के पल
पल पल हरक्षण हरपल

सोच न गम की हरपल
खुशियाँ बीती पल पल
तो गम बीतेगा पल पल
पल पल हरक्षण हरपल

जैसे बहता हो हरपल
नल से जल कल-कल
वैसे खोता जीवन पल
पल पल हर क्षण हरपल

सबका वक़्त बीते हरपल
मौत आती पास पल पल
तो जीले तू अपने हरपल
पल पल हरक्षण हरपल

जीवन के क्षणिक “पल” को समर्पित “एक अधूरी रचना”
-Dev B