Posts tagged ‘relationship’

August 21, 2011

You lost your words or I lost my hearing

by Dev B

Moments when we met in that summer.
Those sweet moments I still remember.

You asked my story, I asked your story
We talked about roller-coaster journey
It was almost enough to write history
Don’t know when we started our story.

We have numbers of similarities.
It questioned our singularities.

We traveled in emotion’s wain.
Our life had similar stain
We share the bond of pain.
Words were coming as rain.

It seemed God has heard our urge
And our lives started sudden surge

I don’t know what but something’s missing
May be Words, which were dazzling & raining
It formed a big gap, now heart is paining
You lost your words or I lost my hearing.

Better let the things happen naturally.
Believe me silence will break us badly

Where’re those tangible expressions.
Plz come back with communications.
Where’re those invincible passions.
Don’t tell, we don’t have emotions.

Moments when we met in that summer.
Those sweet moments I still remember.

– Dev B
As it happened. Inspired from someone’s life story.

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August 19, 2011

तन्हाई और परछाई

by Dev B

लिए ढेर सारी तन्हाई
सुबह ने बनायीं कई परछाई
उनमे एक थी “मेरी परछाई”
चला था लिए मैं तन्हाई,
राह न जाने “मेरी परछाई”|

साथ चली थी कई परछाई
कभी वो अपनी थी तन्हाई
कभी वो परायी थी परछाई,
कभी वो काली थी परछाई
कभी वो धुंधली थी तन्हाई

बनती बिगडती परछाई
हल चल करती तन्हाई
पल पल बदलती परछाई
क्षण क्षण छलती परछाई
मन मन बहलाती तन्हाई

बढती घटती थी परछाई
तन ढंग थी सारी परछाई
मन संग थी एक तन्हाई
जो अब दूर करे तन्हाई
मन ढूंढती थी “वो परछाई”

जानी पहचानी सी परछाई
मिल गई एक “वो परछाई”
कुछ खास थी अब तन्हाई
घटती मन की अब तन्हाई
लगी मुझ-सी “वो परछाई”

पल पल ख़तम होती तन्हाई
हर पहर बढती “वो परछाई”
क्या मेरी थी “वो परछाई”
या मैं था उसकी “वो परछाई”
एक दूजे के हम “वो परछाई”

साँझ होते धुंधलाई “वो परछाई”
फिर घबराई “मेरी परछाई”
उस रात जानी “मेरी परछाई”
मेरी या तेरी हो “वो परछाई”
अँधेरे में न साथ देती “कोई परछाई”

– Dev B

August 10, 2011

मेरे हर छोटे सवाल पर, तुम क्यूँ मलाल करते हो ?

by Dev B

मेरे हर छोटे सवाल पर, तुम क्यूँ मलाल करते हो ?

जो मैं पूंछूं
“क्या है अब आज नैतिक”?
तुम बोले
“बची है बस वो मौखिक ”

जो मैं पूंछूं
“क्या है अब आज लौकिक”?
तुम बोले
“नहीं रही है बात ये मौलिक ”

मेरे हर छोटे सवाल पर, तुम क्यूँ मलाल करते हो ?

जो मैं पूंछूं
“क्या और कैसा है प्यार”?
तुम बोले
“बस है वो एक व्यपार”

जो मैं पूंछूं
“क्या है तुम्हारा रिश्ता”?
तुम बोले
“मंजिल का है ये राश्ता”

मेरे हर छोटे सवाल पर, तुम क्यूँ मलाल करते हो ?

जो मैं पूंछूं
“क्या यही है दुनिया की सची ताल “?
तुम बोले
“दुनिया की हर चाल है बेताल ”

जो मैं पूंछूं
“क्यूँ ऐसे है तुम्हारे जबाब”?
तुम बोले
“सिख लो दुनियादारी जनाब”

मेरे हर छोटे सवाल पर, तुम क्यूँ मलाल करते हो ?

– Dev B

Poetic version of a peppy talk between me and my friend.
My simple questions, His complex answers…huh..
As promised, One day, I will prove you wrong.
Anyways, Thanks for all GYAANs. 🙂
This is for you Dude.