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November 9, 2007

सागर-सा-प्यार पर शब्दाभाव

by Dev B

वो थोड़ी देर से घर आने पर ,
उनका मुझे घर से निकालना |
वो मुझे चोट खरोच आने पर,
उनका घर सर पर उठा लेना |
वो दोपहर धुप में मेरे खेलने पर,
गुस्से में “कपिल देव” संबोधन |
वो खेल में मुझे चोट लगने पर,
प्यार से “क्रिकेट किट” प्रलोभन |
वो वारिश में मेरे भींगने पर,
उनका डाटना और धमकाना |
वो मेरी तबियत खराब होने पर,
उनका पूरी पुरी रात जागना |
वो मुझसे नाराज होने पर,
उनका रूठना और न बोलना |
वो मेरे आस पास न होने पर,
उनका “नाटु भाई” पुकारना |
वो सड़क किनारे खाने पर,
उनका डाटना और फटकारना
वो उनका रोज़ घर आने पर,
कुछ न कुछ मेरे लिए लाना |
वो मेरे पढ़ाई न करने पर ,
उनकी “डांट की जन्म-घुटी”|
वो मेरी रिजल्ट की तारीख पर,
उनकी व्यग्रता और अधीरता|
वो हर रोज़ सुबह और रात,
उनका मेरे साथ ही खाना |
वो नए शहर को मेरा जाना और
मेरी याद में उनका आंशु बहाना |
वो नौकरी करने की सोच पर,
उनका आगे पढने को कहना |
वो मेरी हरेक जॉब ऑफर पर,
उनका मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा जाना |
वो विदेश जाने की खबर पर,
उनका मुझे न जाने को कहना |
वो मेरे वहां परदेश में होने पर,
उनका पूरी रात फ़ोन को निहारना |
वो एक दिन मुझसे बात न होने पर ,
उनका मुझसे बार बार नाराज़ होना |
वो कई सालों से शाम ८ बजने पर ,
उनका छोटा-सा फ़ोन कॉल आना |
मेरे आस पास सब कुछ बदल रहा है पर,
उनके भावनाओ का कभी नहीं बदलना|
उनका सागर-सा-प्यार पर शब्दाभाव,
“मेरा होना” ही उनका सर्वश होना|
– Dedicated to my hero and best person in my life.
– On the way to my country, Missing that person
– Dev B

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Just found above incomplete and amateur writing, on the last page of one of my oldest surviving office notebook. Initially I thought to rewrite it but that will change the emotions and soul of this writing. Finally posting this amateur writing without making much change. Let’s guess – It is dedicated to whom? 🙂
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