Archive for ‘Hindi’

October 26, 2011

मोमबती

by Dev B

कुछ खास की आश में
दीप्त हो बना प्रकाश मैं
मन मेरा था मोम कभी
जल कर धुँआ हुआ अभी
रोशिनी की थी अभी यही
पर तल मेरे बस अँधेरा ही
बहुत जला मैं बन बाती
बुझने का बक्त हुआ साथी

भूल मुझे,कोई दीप नया
फिर तुम वहीँ जलाओगे
जहाँ प्रकाश बन इठलाया
आज राख वही मैं बना
कोशिश, कुछ शेष न बचूं
यादे बन अवशेष न रहूँ
बहुत जला मैं बन बाती
बुझने का बक्त हुआ साथी

-Dev B

जो लोग कभी हमारी खुशियों हुआ करते थे, हम आज की खुशियों में उन को भूल जाते…

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September 16, 2011

क्या है तू मोहब्बत?

by Dev B

मंदिर की इमारत तू
मौला की इबादत तू
तेरी जज्बात है दौलत
तेरी चाहत है आदत
तेरी शक्सियत है शोहरत
तेरी हिमायत है कायनात

मंदिर की इमारत तू
मौला की इबादत तू
तेरे शरारत में शराफत
तेरे नफ़रत में हिफाज़त
तेरे खिलाफत में जमानत
तेरे ख्यालात में फुर्सत

मंदिर की इमारत तू
मौला की इबादत तू
तू इंसानियत की इज्जत
तू कुदरत की इनायत
तू रांझे की शहादत
तू हीर की मोहब्बत

– Dev B
Finally I wrote the LOVE.

( First total happy post on this blog. Thanks for feedbacks. )

Life is full of love,  all you need a “heart” to have it.

August 20, 2011

गुल और गुलफाम

by Dev B

ग़म की गुलशन में
गुल की गुज़ारिश पे
गरीब गुलफाम ने,
गुमसुम गुमशुदा गिरां
ग़ज़ल गुलिश्तां की थी|

गैहान में गुप्तगू है कि
गुमराह गुल आज गैर
गर्दन में गुमगश्त है और
गुलिश्तां वो गर्द है आज
गुलफाम के दो गज पे|

     गिरां= अमूल्य | गुमगश्ता= भटकता |गैहान= संसार

-Dev B
(My first urdu writing, Dedicated to and Inspired by Sahir Saab’s life)

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August 20, 2011

पंद्रह साल बाद वो मुझसे मिलने आई

by Dev B

लगभग पंद्रह साल बाद
मुझसे मिलने वो आई थी
इन सालो मैं और मेरी
दुनिया बहुत बदली थी
पर उसे देख लगा वक़्त
संग उसके वहीं रुकी थी
रंग वही सफ़ेद दुधिया
बाल जैसे मेघ बदरिया
माथे पर लाल बिंदिया
आँखों में प्यार की नदिया
चहरे वही थोड़ी झुर्रिया
थोड़ी भी न वो बदली थी

सर रख गोद में उसके
मैंने आराम पाया था
उसके पुराने कहे किस्से
आज भी आँखों बसते थे
हर बात कहनी उससे
पर कह नहीं पाया था
मेरे अनकहे नए किस्से
अब आंसू बन मेरे बहे थे
वो बिन कहे सब वो समझे
आंखे उसकी भी भींगी थी
न कुछ वो बोल पायी थी
न कुछ मैं बोल पाया था
और जाने को वो हुई थी

मैंने पूछा – इतनी देर
क्यूँ आने में तुमने की थी?
अबकी जल्दी आना तुम
न आना तो पास बुलाना
हाँथ पकड़ उसके रोका
तभी आया ठंडा झोंका
आंखे खुली तो तनहा मैं
सुबह का सपना टुटा था|
सामने दीवार लगी उसकी
सालो पूरानी तस्वीर थी|
अपने ही कहानी की परियां
बन दादी अब मेरे साथ थी|

– Dev B
It’s been almost 15 years since my grandmother left us.
Today, It is first time when she came into my dreams.
Miss you “DADI”

August 19, 2011

तन्हाई और परछाई

by Dev B

लिए ढेर सारी तन्हाई
सुबह ने बनायीं कई परछाई
उनमे एक थी “मेरी परछाई”
चला था लिए मैं तन्हाई,
राह न जाने “मेरी परछाई”|

साथ चली थी कई परछाई
कभी वो अपनी थी तन्हाई
कभी वो परायी थी परछाई,
कभी वो काली थी परछाई
कभी वो धुंधली थी तन्हाई

बनती बिगडती परछाई
हल चल करती तन्हाई
पल पल बदलती परछाई
क्षण क्षण छलती परछाई
मन मन बहलाती तन्हाई

बढती घटती थी परछाई
तन ढंग थी सारी परछाई
मन संग थी एक तन्हाई
जो अब दूर करे तन्हाई
मन ढूंढती थी “वो परछाई”

जानी पहचानी सी परछाई
मिल गई एक “वो परछाई”
कुछ खास थी अब तन्हाई
घटती मन की अब तन्हाई
लगी मुझ-सी “वो परछाई”

पल पल ख़तम होती तन्हाई
हर पहर बढती “वो परछाई”
क्या मेरी थी “वो परछाई”
या मैं था उसकी “वो परछाई”
एक दूजे के हम “वो परछाई”

साँझ होते धुंधलाई “वो परछाई”
फिर घबराई “मेरी परछाई”
उस रात जानी “मेरी परछाई”
मेरी या तेरी हो “वो परछाई”
अँधेरे में न साथ देती “कोई परछाई”

– Dev B

August 18, 2011

पल पल हरक्षण हरपल

by Dev B

पल पल में बीता कल
बीत रहा आज हरपल
तो पल पल बीतेगा कल
पल पल हरक्षण हरपल

तू समर्पण कर हरपल
तू अर्पण कर पल पल
तो न समझे कोई हरपल
पल पल हरक्षण हरपल

इन्तजार न कर हरपल
ऐतबार न कर पल पल
तो बेजार न कर ये पल
पल पल हरक्षण हरपल

छुटे साथ कोई हरपल
टूटे बिस्वास पल पल
तो जीले रिश्तों के पल
पल पल हरक्षण हरपल

सोच न गम की हरपल
खुशियाँ बीती पल पल
तो गम बीतेगा पल पल
पल पल हरक्षण हरपल

जैसे बहता हो हरपल
नल से जल कल-कल
वैसे खोता जीवन पल
पल पल हर क्षण हरपल

सबका वक़्त बीते हरपल
मौत आती पास पल पल
तो जीले तू अपने हरपल
पल पल हरक्षण हरपल

जीवन के क्षणिक “पल” को समर्पित “एक अधूरी रचना”
-Dev B

August 15, 2011

आज देश को

by Dev B

आज देश को
न राहुल
लाडला चाहिए
न बरुण
बाबला चाहिए
न बाबा
भगोड़ा चाहिए
न अन्ना
प्यारा चाहिए

आज देश को
सच समझे
वो सूत्र चाहिए

आज देश को
न फसबूक
लाइक चाहिए
न ट्विट्टर
रि-ट्विट्ट चाहिए
न ईमेल
मैल-बोक्स चाहिए
न एस-ऍम-एस
इन-बॉक्स चाहिए

आज देश को
रियल हो
वो पूत चाहिए

आज देश को
न भगवा
रंग चाहिए
न हरा
ढंग चाहिए
न बहुजन
संग चाहिए
न सर्वजन
भंग चाहिए

आज देश को
सिर्फ तिरंगा जाने
वो बूत चाहिए

– Dev B

August 10, 2011

मेरे हर छोटे सवाल पर, तुम क्यूँ मलाल करते हो ?

by Dev B

मेरे हर छोटे सवाल पर, तुम क्यूँ मलाल करते हो ?

जो मैं पूंछूं
“क्या है अब आज नैतिक”?
तुम बोले
“बची है बस वो मौखिक ”

जो मैं पूंछूं
“क्या है अब आज लौकिक”?
तुम बोले
“नहीं रही है बात ये मौलिक ”

मेरे हर छोटे सवाल पर, तुम क्यूँ मलाल करते हो ?

जो मैं पूंछूं
“क्या और कैसा है प्यार”?
तुम बोले
“बस है वो एक व्यपार”

जो मैं पूंछूं
“क्या है तुम्हारा रिश्ता”?
तुम बोले
“मंजिल का है ये राश्ता”

मेरे हर छोटे सवाल पर, तुम क्यूँ मलाल करते हो ?

जो मैं पूंछूं
“क्या यही है दुनिया की सची ताल “?
तुम बोले
“दुनिया की हर चाल है बेताल ”

जो मैं पूंछूं
“क्यूँ ऐसे है तुम्हारे जबाब”?
तुम बोले
“सिख लो दुनियादारी जनाब”

मेरे हर छोटे सवाल पर, तुम क्यूँ मलाल करते हो ?

– Dev B

Poetic version of a peppy talk between me and my friend.
My simple questions, His complex answers…huh..
As promised, One day, I will prove you wrong.
Anyways, Thanks for all GYAANs. 🙂
This is for you Dude.

August 8, 2011

फिर आज मन उदास है

by Dev B

फिर आज मन उदास है
नहीं कोई अपना पास है

जो पास है जिंदा लाश है
टूट रहा हरेक बिश्वास है

भावनाए कर रही त्राश है
अजब सा ये एहसास है

चल रही धीमी साँस है
एक उलझी हुई फाँस है

एक अनबुझी प्यास है
अनजानी ये तलाश है

जिंदगी खेल “ताश” है
मन सोचता “काश” है

गम में भी एक मिठास है
हरेक पल बहुत खास है

दिल नहीं हुआ निराश है
इसे ख़ुशी की भी आश है

मौला मन में तेरा वास है
फिर भी मन क्यूँ उदास है?

-Dev B

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August 6, 2011

जिंदगी कब किस ओर मुड़ जाए

by Dev B

किसी को खबर नहीं
है कि जिंदगी कब
किस ओर मुड़ जाए|
इस ओर जाएगी कि
उस ओर मुड़ जाएगी|
सीधी गयी भी तो क्या?
पकड़े राह कोई तो क्या?
मंजिल एक ही पायेगी|
वो मंजिल जो मेरी है
वही मंजिल तेरी भी है,
मंजिल है वही सबकी |
फिकर-ऐ-मंजिल
फिर करो क्यूँ तुम?
आश-ऐ-मंजिल
फिर रखो क्यूँ तूम?
राही बनो तुम
जिसकी राह नहीं|
बटोही बनो तुम
जिसकी बाट नहीं|
तुम अपनी राह
खुद आप बनाओ |
राह वो ऐसी हो कि
जिंदगी हमराह बने|
संग तेरे जिंदगी चले
तेरे संग जिंदगी मुड़े|
किसी को खबर नहीं
है कि जिंदगी कब
किस ओर मुड़ जाए|
– Dev B