Archive for ‘Gazal’

August 20, 2011

गुल और गुलफाम

by Dev B

ग़म की गुलशन में
गुल की गुज़ारिश पे
गरीब गुलफाम ने,
गुमसुम गुमशुदा गिरां
ग़ज़ल गुलिश्तां की थी|

गैहान में गुप्तगू है कि
गुमराह गुल आज गैर
गर्दन में गुमगश्त है और
गुलिश्तां वो गर्द है आज
गुलफाम के दो गज पे|

     गिरां= अमूल्य | गुमगश्ता= भटकता |गैहान= संसार

-Dev B
(My first urdu writing, Dedicated to and Inspired by Sahir Saab’s life)

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