Archive for August 20th, 2011

August 20, 2011

गुल और गुलफाम

by Dev B

ग़म की गुलशन में
गुल की गुज़ारिश पे
गरीब गुलफाम ने,
गुमसुम गुमशुदा गिरां
ग़ज़ल गुलिश्तां की थी|

गैहान में गुप्तगू है कि
गुमराह गुल आज गैर
गर्दन में गुमगश्त है और
गुलिश्तां वो गर्द है आज
गुलफाम के दो गज पे|

     गिरां= अमूल्य | गुमगश्ता= भटकता |गैहान= संसार

-Dev B
(My first urdu writing, Dedicated to and Inspired by Sahir Saab’s life)

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August 20, 2011

पंद्रह साल बाद वो मुझसे मिलने आई

by Dev B

लगभग पंद्रह साल बाद
मुझसे मिलने वो आई थी
इन सालो मैं और मेरी
दुनिया बहुत बदली थी
पर उसे देख लगा वक़्त
संग उसके वहीं रुकी थी
रंग वही सफ़ेद दुधिया
बाल जैसे मेघ बदरिया
माथे पर लाल बिंदिया
आँखों में प्यार की नदिया
चहरे वही थोड़ी झुर्रिया
थोड़ी भी न वो बदली थी

सर रख गोद में उसके
मैंने आराम पाया था
उसके पुराने कहे किस्से
आज भी आँखों बसते थे
हर बात कहनी उससे
पर कह नहीं पाया था
मेरे अनकहे नए किस्से
अब आंसू बन मेरे बहे थे
वो बिन कहे सब वो समझे
आंखे उसकी भी भींगी थी
न कुछ वो बोल पायी थी
न कुछ मैं बोल पाया था
और जाने को वो हुई थी

मैंने पूछा – इतनी देर
क्यूँ आने में तुमने की थी?
अबकी जल्दी आना तुम
न आना तो पास बुलाना
हाँथ पकड़ उसके रोका
तभी आया ठंडा झोंका
आंखे खुली तो तनहा मैं
सुबह का सपना टुटा था|
सामने दीवार लगी उसकी
सालो पूरानी तस्वीर थी|
अपने ही कहानी की परियां
बन दादी अब मेरे साथ थी|

– Dev B
It’s been almost 15 years since my grandmother left us.
Today, It is first time when she came into my dreams.
Miss you “DADI”