Archive for August 1st, 2011

August 1, 2011

कविताये नहीं लिखता हूँ मैं

by Dev B

कविताये नहीं लिखता हूँ मैं
भावनाए नहीं बेचता हूँ मैं
जो भी देखा आस पास मैं
झाँका जो तेरी जिंदगी में
पाया जो मेरी जिंदगी में
उतनी ही बात कहने की मैं
प्रयास असफल करता हूँ मैं
जो देखता अँधियारा हूँ मैं
उसमें भी रौशनी ढूंढता हूँ मैं
हँसते चहरे जब देखता हूँ मैं
उनके गम भी समझता हूँ मैं
शब्द छोटे-बड़े चुनता हूँ मैं
कुछ नयी नहीं लिखता हूँ मैं
जो कही बात थी तेरे मन में
जो छुपी बात थी मेरे मन में
वो कही अनकही कहता हूँ मैं
कविताये नहीं लिखता हूँ मैं
शब्दों से नहीं खेलता हूँ मैं
बस भावनाए लिखता हूँ मैं
जो भी देखा आस पास मैं
झाँका जो तेरी जिंदगी में
पाया जो मेरी जिंदगी में
उतनी ही बात कहने की मैं
प्रयास असफल करता हूँ मैं
जो देखता अँधियारा हूँ मैं
उसमें भी रौशनी ढूंढता हूँ मैं
हँसते चहरे जब देखता हूँ मैं
उनके गम भी समझता हूँ मैं
शब्द छोटे-बड़े चुनता हूँ मैं
कुछ नयी नहीं लिखता हूँ मैं
जो कही बात थी तेरे मन में
जो छुपी बात थी मेरे मन में
वो कही अनकही कहता हूँ मैं
बस भावनाए ही लिखता हूँ मैं
शब्दों से नहीं खेलता हूँ मैं
कविताये नहीं लिखता हूँ मैं

  Dev B
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