Archive for August 14th, 2010

August 14, 2010

निशां पलको पर हो जब

by Dev B

मिलके तुमसे न जाने कब
जग भूल हम तुम में खोये
खवाब यूँ सच लगते है जब
कुछ और कोई, कैसे देख पाये
साथ साथ खुले आंखे तब
बहुत सारे सपने है सजाये

टूटे सारे सपने जब
राते बिते हमारे बिना सोये
बस उस पल से अब
तलक हम बहुत रोये
निशां पलको पर हो जब
हम आंख भी कैसे धोये

– Dev B

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