मैं जो चाहता हूँ वो करता हूँ |

by Dev B

हाँ मैं थोड़ा पागल हूँ |

क्यूंकि मेरे शहर के लोग आज महानगरो की ओर दौड़ रहे हैं,

तो मेरा दिल आज दिल्ली से दूर पटना लौटने को चाहता है |

क्यूंकि ब्रांड के फैशन और मॉल के दौड़ में

अपनी एक नई पतलून से ब्रांड का नाम हटाना चाहता हूँ |

हाँ मैं थोड़ा पागल हूँ |

क्यूंकि इस महानगर की लालबत्ती के फुटपाथ पर,

रोते दूधमुहे बच्चे के साथ, मेरी भी आँखों को नम करना चाहता है |

क्यूंकि सुबह सुबह ऑफिस के रास्ते में रोज मिलने

वाले स्कूल बस से झांकते बच्चो को चिढाना चाहता हूँ |

हाँ मैं थोड़ा पागल हूँ |

क्यूंकि हर पल बनते बिगड़ते रिश्तों की दुनिया में ,

मैं हर छोटे – बड़े रिश्ते निभाना चाहता हूँ |

क्यूंकि अपने दोस्तों की कसी गई फब्तियों पर,

मुझे हँसी नही आती बल्कि उनसे घृणा करना चाहता हूँ |

हाँ मैं थोड़ा पागल हूँ |

क्यूंकि मुझे बोलती भीड़ में,

आज भी चुप रहकर सबकी सुनना चाहता हूँ |

क्यूंकि आज अपने अंग्रेज बॉस से मीटिंग नही,

बार्तालाप करना चाहता और उससे हिन्दी सुनना चाहता हूँ|

हाँ मैं थोड़ा पागल हूँ |

क्यूंकि अब आपको लग रहा होगा की मैं पुरा पागल हूँ ,

मैंने माना है की मैं हूँ|

पर मैं तो खुश हूँ ,क्यूंकि मैं जो चाहता हूँ वो करता हूँ |

– Dev  B

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