सपनों का मर जाना ही, एक नई जिंदगी की सुरुआत है |

by Dev B

सपनो के साथ जीते जीते, न जाने कब सपनो से रिश्ता छुट गया |
और मरे हुए सपनो के साथ ,न जाने कब एक रिश्ता बन गया |

या यूँ कहो की ,
सपनों का मर जाना ही एक नई ज़िंदगी की शुरुआत थी |
क्यूंकि तब सिर्फ़ सपने जीते थे,
और सिर्फ़ सपने ही अपनों में थें |
क्यूंकि जब सपने मरे थे,
और तब ही मैंने घर को अपना जाना था |
क्यूंकि तब जाकर जाना,
सपनो के सुनहरे चादर के नीचे भी सचाई थी |
क्यूंकि चादर ढांप लेती थी,
पापा की थकान को और मां की मजबूरी|
क्यूंकि चादर ढांप लेती थी,
बहन की ऊब को और भाई के सपने|
क्यूंकि चादर ढांप लेती थी,
मुझसे जुड़े दुसरो के सपनो को |

सपनो के साथ जीते जीते, न जाने कब सपनो से रिश्ता छुट गया |
और मरे हुए सपनो के साथ , न जाने कब एक रिश्ता बन गया |

आज फिर न जाने क्यूँ,
पुराने सपनो के रिस्तो को जोड़ना चाहता हूँ |
क्यूंकि सपनो ने,
फिर पर्दों से झांकना सुरु कर दिया है |
क्यूंकि मुर्दे सपनो की अंगराई,
फिर मेरी नींद में खलल डाला है |
क्यूंकि जब सपने मर जाते हैं,
तो सारा व्यक्तित्व नंगा हो जाता है|
क्यूंकि इस नंगई में ही हम,
अपने जीवन का कोना तलाश लेते हैं|
क्यूंकि सपनो के लाश पर
हम बैठ जाते हैं, सिमटकर, थककर,
क्योंकि अब हमें वहीं उस लाश साथ,
खुद को तलाशने की झूठी कोशिश करनी है|

सपनो के साथ जीते जीते, न जाने कब सपनो से रिश्ता छुट गया |
और मरे हुए सपनो के साथ , न जाने कब एक रिश्ता बन गया |

पर कैसे भूल जाऊं |
सपनों का मर जाना ही,
एक DEGREE की सुरुआत है |
सपनों का मर जाना ही,
एक JOB की सुरुआत है |
सपनों का मर जाना ही,
समझदारी की पहचान है |
सपनों का मर जाना ही,
सामाजिक हर्ष है।
सपनों का मर जाना ही,
एक नई जिंदगी की सुरुआत है |

सपनो के साथ जीते जीते, न जाने कब सपनो से रिश्ता छुट गया |
और मरे हुए सपनो के साथ , न जाने कब एक रिश्ता बन गया |

अब ये मुर्दे सपने, अपने सपने
खिड़कियों से नही झांकते,
फिर भी परदे लगा रखे हैं |
सपनो की कब्र पर आखिरी कील ठोकी
उस कील पर टंगे नेमप्लेट लगाया
न जाने उसपर क्या क्या लिख दिया |
सपनों को मार दफ़न कर देना
आज सब कुछ था, है और रहेगा|
अब तो बस सपनों का मर जाना ही,
एक नई जिंदगी की सुरुआत है |

सपनो के साथ जीते जीते, न जाने कब सपनो से रिश्ता छुट गया |
और मरे हुए सपनो के साथ , न जाने कब एक रिश्ता बन गया |

-Dev B

– Oct-Nov 2005

-8ft*7ft , Ashram

A reply to my favorite poem “सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना

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